अनजान सवाल

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कुछ लड़कें-लड़कियाँ गणित की कक्षा में बैठे सवाल हल कर रहें थे। गणित के अध्यापक उन्हें एक के बाद एक सवाल दे रहे थे। कक्षा के दौरान पीछे बैठा प्रणय सो गया। जिसकी वजह से उसके सवाल हल नहीं हो पाए। गणित के अध्यापक ने अंत में एक सवाल देते हुए बच्चों से कहा, 'मैंने तुम सबको सारे सवाल हल करा दिए हैं पर अब जो सवाल मैं तुम्हें गृहकार्य के लिए दे रहा हूँ वह बहुत कठिन सवाल है जिसे मैं भी पहली बार बिना किसी मदद के नहीं हल कर पाया। देखते हैं तुम सब सीखकर हल कर पाते हो या नहीं।' 

सभी बच्चों ने गृहकार्य का वह कठिन सवाल उतार लिया। कालांश की घंटी बजी तो अचानक पीछे सोया प्रणय उठा। उसने देखा अध्यापक अपनी चीजें समेट कर जाने लगे हैं और अंतिम कालांश होने के कारण बाकी बच्चे भी कुछ झूण्ड़ में कुछ अकेले अपने-अपने घरों को चले जा रहें हैं पर प्रणय का दीमाग बिल्कुल स्वेतपट(white board) पर ही टिका हुआ था क्योंकि उसपर कुछ सवाल लिखे थे, जिन्हें घर से करके लाना है। उसने जल्दी से अपनी उत्तर पुस्तिका में सवाल उतारा और बस्ता समेट के वो भी घर को चल दिया। 

2

सभी बच्चे अपने-अपने घरों पर गृहकार्य करने बैठते हैं  पर गणित के अध्यापक द्वारा दिया गया किसी का सवाल हल नहीं हो पाता क्योंकि सवाल कठिन है और सब सोचते हैं 'जब इस सवाल को गुरु जी नहीं हल कर पाए तो हम कैसे हल कर पायेंगे।' 

3

सभी बच्चे कक्षा-कक्ष में बैठे बड़ें कौतुक से एक-दूसरे को देख रहें हैं क्योंकि किसी का सवाल हल नहीं है। गणित के अध्यापक आते हैं और सबसे गृहकार्य दिखाने को कहते है। सब अपनी-अपनी उत्तर पुस्तिका दिखाते हैं पर किसी ने सवाल का सही उत्तर नहीं लिखा है, प्रणय भी अपनी उत्तर पुस्तिका दिखाता है पर इस उत्तर पुस्तिका को देख कर गुरु जी की आँखें कुछ ज्यादा खुल जाती हैं, भौहें चढ़ जाती हैं, पेशानी पर बल पड़ता है तो माथे की रेखाएं झलक उठती हैं, वह उत्तर पुस्तिका अपलक देखते ही रह जाते हैं। प्रणय कुछ डरा हुआ सा है क्योंकि वह कल कक्षा में सो गया था वह सोचता है सम्भवतः अध्यापक को वह बात याद आ गयी है और अब मुझे सजा मिलेगी। उधर कक्षा के अन्य बच्चे अध्यापक की भावभंगिमा को पढ़कर अपने-अपने अनुसार अनुमान लगा रहे है तबतक अध्यापक उत्तर पुस्तिका को देखने की एकाग्रता में लीन, बिना अपनी दृष्टि घुमाए प्रणय से पुछते हैं, "प्रणय क्या ये सवाल तुमने हल किया है"। "जी गुरुजी" प्रणय डरते-डरते कुछ संकोच के साथ जवाब देता है। वह कल कक्षा में सोने वाली बात को याद करके अब भी डरा हुआ है। "शाबाश, तुमने को कमाल कर दिया प्रणय" अध्यापक कहते हैं कुछ क्षण रुक कर वो अपनी बात पूरी करते हैं, 'मैंने आजतक अपने जीवन में किसी को बिना किसी वरिष्ठ की सहायता के इस सवाल को हल करते नहीं देखा, तुमने किसकी सहायता ली जरुर कोई होनहार होगा, बताओ किसकी सहायता से हल किया।' यह बोलते समय गुरुजी का चेहरा खिला हुआ है।

प्रणय फिर सहम जाता है क्योंकि उसे लगता है कि कल उसके सोने के कारण गुरुजी विश्वास नहीं कर पा रहे कि यह सवाल उसने हल किया है पर अब वह अपने साहस को इक्कठा करके फिर जवाब देता है, "गुरुदेव बिना सवाल हल किए! मैं विद्यालय कैसे आ सकता था, बाकी सबने भी सवाल हल किए हैं पर मुझे थोड़ी ज्यादा मेहनत करनी पड़ी क्योंकि मैं कक्षा में सो गया था उसी दौरान आपने सवाल हल कराए। आपने जो गृहकार्य दिया था, बस उसे ही मैंने स्वेतपट्ट से उतारा।' प्रणय इस बात से अनजान है कि उसके सिवा कोई भी विद्यार्थी सवाल हल नहीं कर पाया। अध्यापक प्रणय की बात सुनकर सभी बच्चों से पूछते हैं, "प्रणय के अलावा यह सवाल कौन-कौन हल करके लाया है" किसी की तरफ से जवाब ना मिलता देख गुरुजी पुनः प्रणय की तरफ बड़ें गौर से देखते हैं और कारण जानने की कोशिश करते हैं कि बाकी सभी बच्चों से सवाल हल नहीं हुए पर प्रणय ने यह कर दिखाया। 

अध्यापक आश्चर्य और प्रशन्नता के भाव से भरें सोचते हैं कि प्रणय ने यह सवाल कैसे हल किया होगा। उनके मन में सारी कहानी स्पष्ट होती है जब उन्हें ध्यान आता है कि कल प्रणय सो गया था। वो सभी बच्चों को बताते हैं- 

"बच्चों देखो जब हम अपने मस्तिष्क को सीमाओं में बाँध लेते हैं तो हमारा मस्तिष्क सीमित व्यवहार करता है। कल मैंने तुम सबसे कहाँ मैं यह सवाल नहीं हल कर पाया, तुम सब करके दिखाओ पर तुम सबमें कोई सवाल हल नहीं कर पाया क्योंकि तुम यह मान बैठे थे जो सर नहीं हल कर पा रहे वह हमसे कैसे होगा पर प्रणय ने मेरी बात नहीं सुनी वह सो रहा था। जब वह उठा तो उसके सामने सिर्फ सवाल था कोई पूर्वाग्रह नहीं था। प्रणय का मस्तिष्क इन सब बातों से परे था। उसने सिर्फ सवाल देखा और हल करने के बारे में सोचा। कठिन या सरल सवाल का ध्यान उसे रहा ही नहीं, उसने हमेशा हल ढूढ़ा। तुम भी कहीं-सुनी बातों को मत ढोओं और अपने मस्तिष्क पर विश्वास करो।" बच्चों को मस्तिष्क के इस पहलू को जानकर बहुत आश्चर्य हुआ।

पहली कहानी लिखी हैं कृपया बताएं कैसी है, चाहें मुझे व्यक्तिगत या यहीं कमेंट करें।

(सत्य घटना पर आधारित)




टिप्पणियां

  1. बहुत अच्छा... प्रकाश !....

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  2. पूर्वाग्रह, बहुत सटीक भूमिका निभाने वाला शब्द है दूसरे के प्रति अच्छा या बुरा कर्म, बोल या व्यव्हार करने के लिए....

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