मैं जिम्मेदार हूँ I am responsible

मैं जिम्मेदार हूँ, यह एक मंत्र है। 

      मंत्रों को सिद्ध करना पड़ता है। मंत्रों के लिए कभी प्रश्नवाचक चिन्ह नहीं लगाया जाता कि यह काम कैसे करता है? आप की आस्था और विश्वास मंत्रों को काम में लगाकर सिद्धि तक ले जाते हैं। मंत्रों की सिद्धि के लिए पीड़ित लोग (कुछ स्वस्थ भी) बड़ें-बड़ें यज्ञ, पण्डित मण्डली द्वारा मंत्र सिद्धि कराते हैं। मंत्रों की सिद्धि के लिए.. लाख, दो लाख या करोड़ मंत्र जपने के लिए.. ऐसे आयोजन करने पड़ते हैं। बहुत से लोग स्वयं नियमित या अनियमित रुप से अपनी माला जपते रहते हैं। 108 दानें की माला सर्व प्रिय प्रसिद्ध है। आप भी 108 दानें की माला या जैसे भी हो सके "मैं जिम्मेदार हूँ" मंत्र को जप सकते हैं जो इस लेख का मुख्य विषय है।

    चलिए अपने विषय पर आते हैं। मैं जिम्मेदार हूँ। हाँ मैं जिम्मेदार हूँ। प्रश्न है??? कि मैं जिम्मेदार किस लिए हूँ? उत्तर-अपनी प्रत्येक अवस्था, स्थिति, परिस्थिति, शक्ल, सूरत, विचार.. आर्थिक, सामाजिक, दैविक, भूत भविष्य और वर्तमान में मेरे साथ जो भी हो रहा है उन सभी स्थितियों-परिस्थितियों का "मैं जिम्मेदार हूँ"।

    उपर लिखी लाइन जब आप स्वयं से बोलेंगे तो दीमाग विरोध करेगा। वो आपको ढेरों बहाने बतायेगा,  आपके साथ रहने वाले उन लोगों के स्वभाव और स्थायी या गिरगिट की तरह रंग बदलने वाले लोगों की आदत के बारे में बतायेगा। 

वो बतायेगा कि 

सड़क पर चलते समय लगने वाले जाम का जिम्मेदार कौन है?

 वो बतायेगा जिसको आप सबकुछ मानते थे वो कैसे आपके सारे दानों* को भूलकर बेवफा हो गया। 

मैं जिम्मेदार नहीं हूँ के कुछ उदाहरण-

मैं गरीब घर में पैदा हुआ- मैं जिम्मेदार नहीं हूँ

मैंने उसके साथ वफा की उसने धोखा दिया- मैं जिम्मेदार नहीं हूँ।

मेरे जीवनसाथी के चुनाव का..

मैंने पूरी मेहनत की पर मैं फेल हो गया (आरक्षण भी वजह हो सकती है।)

मेरी गरीबी का, मेरी दुर्घटना का, मेरी पति या पत्नी के स्वभाव का, मेरी आनुवंशिक परिस्थितियों का, मेरे माता-पिता, बड़ों या छोटों या समाज की मुझसे अपेक्षाओं का.. और भी बहुत सारी बातें जो आप की स्वयं की मन-मस्तिष्क में उथल-पुथल मचा रहीं होगी उन्हें यहाँ जोड़ लीजिए। समय निकालिए और इनकी सूची बनाइए कि आप खुद को किन बातों के लिए जिम्मेदार नहीं मानते.. और अब बनी हुई सूची को ध्यान से पढ़िए और इन्हें माचिस लेकर जला दीजिए। जलाने के लिए आग ना मिले तो इन्हें फ्लस में बहा दीजिए।

    और फिर अपने अब-तक के जीवन के लिए खुद को जिम्मेदार मानिए, खुद से कहिए "मैं जिम्मेदार हूँ"। क्योंकि आपकी समस्या आपके सिवा कोई और नहीं सुलझाएगा और अगर आपको लगता है कि कोई आपका अपना या पराया आपकी समस्या सुलझाएगा तो ये आपका भ्रम है जो बात आपको समय के साथ समझ में आ जाएगी। जिस दिन से आपके साथ होने वाली हर बात के लिए खुद को जिम्मेदार मानने लगेंगे उसी दिन से आपके दुनिया को देखने का नजरिया अलग होगा जो आपको बेहतर बनाएगा, आत्मविश्वास से भरेगा और आत्मनिर्भर बनाएगा। दुख को सहज सहने की क्षमता प्रदान करेगा.. जिसके लिए आप अक्सर दूसरों का सिर खा जाते हैं- उन्हें जिम्मेदार ठहरा कर।

      "मैं जिम्मेदार हूँ" मंत्र पर अगर पूरा विश्वास न कर पा रहें हों तो इसे एक महीना/एक सप्ताह या एक दिन के लिए ही चुने और जपे और उस चूने हुई अवधि में विश्वास भी करें कि अब तक आप जो भी हैं उसके आप जिम्मेदार हैं। अगर आप ने एक दिन के लिए चुना तो समय पूरा होने पर खुद की समीक्षा करें। और ठीक लगें तो पूरे जीवन के लिए अपना लें,, आप दूसरों को दोष देने से उबर जायेंगे और जीवन को सच्चें ठंग से जीने की कला अपने-आप प्राकृतिक रुप से सीखेंगे।



*"दानों" का दो अर्थ है..
१. अनाज के दानें (जो चिड़िया चुगती है और अक्सर हम भी..)
२. दान देना- बिना वापस पाने की आशा के दान देना, पाने की आशा भी कर सकते हैं(पाने की आशा रखने वाले लोगों के ही दिल टूटते हैं।)

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टिप्पणियां

  1. बहुत अच्छे से जीवन के मर्म को समझाने का प्रयास..👍
    पढ़ कर अच्छा लगा..धन्यवाद🙏

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  2. मैं जिम्मेदार हूँ कि जगह "जैसी हरि इच्छा" मंत्र भीबक़ाफी कारगर है ।

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    1. जी भईया, हरि ईच्छा ही तो हमें जिम्मेदारी का सामर्थ्य देती है।

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